मत बांधो जीवन नौका
किसी
किनारे सागर के
रिश्तों
की ड़ोर से,
आती जाती
हर लहर
टकरायेगी
नौका को
बार बार
किनारे से,
और लौट
जायेगी
देकर एक
नयी चोट
करके तन
क्षत-विक्षत.
छोड़ दो
नौका लहरों के सहारे,
शायद न
मिले मंज़िल
पर होगा
बेहतर डूब जाना
चोट लगने
से अंतस को
पल पल बंधकर मज़बूर ड़ोर से.
...कैलाश शर्मा