ढूँढ रहा हूँ आजादी को, नज़र उठा कर चारों ओर,
कहते सब आज़ाद देश है, ढूँढ रहा मैं उसका छोर.
भूखा मरने की आज़ादी, रोक मगर हक़ को अनशन पर,
जीवन भर था रहा नग्न, अब कफ़न चुराने बैठे चोर.
मेहनतकश इंसान लटकता, हर पल फांसी के फंदे पर,
इंतज़ार में भ्रष्टाचारी, कब खींचूँ में इसकी डोर.
रोटी, घर, शिक्षा के सपने, क़ैद दफ्तरों की फ़ाइल में,
कितनी बार आयेगा गांधी, खोल सके जो उसकी डोर.
सहने की भी एक सीमा है , मत मज़बूर करो जनता को,
जब आवाज़ उठेगी उसकी, सह न पाओगे वह शोर.
स्विस बैंकों में क़ैद करो मत, तुम भारत माता की अस्मत,
उठ जायेगा एक सुनामी, भीगा गर माँ आँखों का कोर.
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !






