Friday, August 24, 2012

मैंने हार अभी न मानी

धूल धूसरित चाहे तन हो,
रोटी चाहे मिली हो आधी.
मैंने हार अभी न मानी,
जिजीविषा अब भी है बाकी.

सोने को बिस्तर क्या होता,
सिर पर कभी न छत है देखी.
उलझे बाल हैं किस्मत जैसे,
पर होठों पे मुस्कान है बाकी.

दोष नहीं देती ईश्वर को,
उसने सबको दिया बराबर.
कुछ ने लूट लिया है पर सब,
लेकिन शक्ति हाथों में बाकी.

कागज़ पर ही बने योजना,
रोटी, शिक्षा स्वप्न है मुझको.
मिटे गरीबी कागज़ पर ही,
जब तक भ्रष्टाचार है बाकी.

पत्थर को जो तोड़ सके है,
हर आंधी को है सह सकती.
आज तुम्हारे हाथों सब कुछ,
पर मेरी किस्मत भी बाकी.

जिस दिन पाप घड़ा फूटेगा,
नज़र चुराओगे खुद से भी.
जग का न्याय खरीद लिया है,
मेरा न्याय मगर है बाकी.

कैलाश शर्मा 

48 comments:

  1. जिस दिन पाप घड़ा फूटेगा,
    नज़र चुराओगे खुद से भी.
    जग का न्याय खरीद लिया है,
    मेरा न्याय मगर है बाकी.

    वाह सर वाह क्या बात है, बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति , तहे दिल से हार्दिक बधाई

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  2. घड़ा पाप का भर चुका, ईंधन संचित ढेर ।

    देर नहीं अंधेर है, इक चिंगारी हेर ।

    इक चिंगारी हेर, ढेर कर घट मंसूबे ।

    होवे तभी सवेर, अभी तक क्यूँ न ऊबे ।

    बची गर्भ में किन्तु, इरादा गलत बाप का ।

    डूबा दूध में मार, भरे फिर घड़ा पाप का ।।

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    1. डूबा दूध में मार, रखे भर घड़ा पाप का ।।

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    2. घड़ा पाप का भर चुका, ईंधन संचित ढेर ।

      देर नहीं अंधेर है, इक चिंगारी हेर ।

      इक चिंगारी हेर, ढेर कर घट मंसूबे ।

      होवे तभी सवेर, अभी तक क्यूँ न ऊबे ।

      बची गर्भ में किन्तु, इरादा गलत बाप का ।

      डुबा दूध में मार, रखे भर घड़ा पाप का ।।

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  3. बेहतरीन और लाजवाब पोस्ट.....हैट्स ऑफ इसके लिए।

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  4. जिस दिन पाप घड़ा फूटेगा,
    नज़र चुराओगे खुद से भी.
    जग का न्याय खरीद लिया है,
    मेरा न्याय मगर है बाकी.
    बिल्‍कुल सच ... इस उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति के लिए आभार

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  5. जिस दिन पाप घड़ा फूटेगा,
    नज़र चुराओगे खुद से भी.
    जग का न्याय खरीद लिया है,
    मेरा न्याय मगर है बाकी.
    उसकी लाठी बेआव़ाज होती है !

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  6. सामाजिक सरोकार से जुड़ी सटीक और सार्थक प्रस्तुति ...

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  7. ये जिजीवषा ही तो मूल प्राण तत्व है .....

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  8. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (25-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  9. दोष नहीं देती ईश्वर को,
    उसने सबको दिया बराबर.
    कुछ ने लूट लिया है पर सब,
    लेकिन शक्ति हाथों में बाकी."हाथों " में स्लेशार्थ है ,जिजीविषा है इन हाथों में ,मगर वो हाथ काले हैं ,ज़माने से निराले हैं ,घोटाले ही घोटाले हैं ,बढ़िया मर्म पैदा करती रचना गरीबी बेबसी को मूर्त रूप देती फिर भी आस पल्लू नहीं छोडती कसके पकडे हुए है रचना ,आस गई तो जीवन गया .
    .कृपया यहाँ भी पधारें -
    शुक्रवार, 24 अगस्त 2012
    Sciatica & Leg Pain

    Sciatica & Leg Pain

    Chiropractic Bringing out the Best in you

    Sciatic Nerve

    Either of the two nerves that run from the back of the hip down the thigh to the calf.
    Your sciatic nerve is the longest and largest nerve in your body .It begins in your lower back as five smaller nerves joining together and extends to your pelvis ,thigh ,knee ,calf ,ankle ,foot and toes.
    Your sciatica nerve is formed from lower lumbar nerves.

    Sciatic means relating to or affecting the back of the hip or the sciatic nerve.Also sciatic means causing sciatica or caused by sciatica.

    What is Sciatica ?

    When this large nerve becomes inflamed the condition is called sciatica(pronounced si’ad-a’ka)and the pain can be intense !The pain may follow the path of your nerve –down the back of your legs and thighs ,down to your ankle ,foot and toes –but it can also radiate to your back !

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  10. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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  11. मेरा न्याय मगर है बाकी... फिर मत कहना - कहा नहीं

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  12. जिस दिन पाप घड़ा फूटेगा,
    नज़र चुराओगे खुद से भी.
    जग का न्याय खरीद लिया है,
    मेरा न्याय मगर है बाकी. मार्मिक रचना बधाई

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  13. उत्साह का यह घट जूझने तक बना रहे।

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  14. सामाजिक जिजीविषा से जुडी
    मार्मिक अभिव्यक्ति..

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  15. शक्ति बची है हाथो में,लूट सके न कोय
    फूटेगा घडा पाप का,न्याय मिलेगा मोय,,,,,,

    RECENT POST ...: जिला अनूपपुर अपना,,,

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  16. बहुत ही सही, सटीक अभिव्यक्ति अंकल..
    सादर
    मधुरेश

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  17. सुदर भाव के साथ सुंदर गीत। बहुत अच्छी पोस्ट। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  18. बहुत ही संवेदनशील रचना ! हर शब्द आत्मा पर आघात करता सा चुटीला ! बेहतरीन लेखन के लिये बधाई !

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  19. बहुत ही सुंदर भाव दिखा रहे हैं
    पर ये तो बहुत ही चालू होते जा रहे हैं
    पाप को घडे़ तक नहीं ले जा रहे हैं
    उपर वाले को भी खाली घड़ा दिखला रहे हैं !

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  20. प्रभावशाली अभिव्यक्ति..

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  21. क्या विद्रोह और कैसा आत्मविश्वास
    उत्तम कविता

    स्वास्थ्य से सम्बंधित कभी भी किसी भी जानकारी के लिए आप फोन भी कर सकते हैं.

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  22. क्या ये पाप का घड़ा कभी भरेगा ...क्या कभी हम लोगों की सोच इस सामाज के लिए बदलेगी ?

    आज का ज्वलंत प्रश्न ???

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  23. कल 26/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  24. आपकी किसी पुरानी बेहतरीन प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार २८/८/१२ को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी मंगल वार को चर्चा मंच पर जरूर आइयेगा |धन्यवाद

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  25. जब उसका न्याय होगा तो होगा अंतिम फैसला, कोई सुनवाई न होगी....
    लाजवाब अभिव्यक्ति.... आभार

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  26. दोष नहीं देती ईश्वर को,
    उसने सबको दिया बराबर.
    कुछ ने लूट लिया है पर सब,
    लेकिन शक्ति हाथों में बाकी.



    सच्चाई से रू-ब-रू कराती पंक्तियां।

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  27. सच्ची ,सामयिक रचना--आम जन की पीड़ा

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  28. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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  29. दोष नहीं देती ईश्वर को,
    उसने सबको दिया बराबर.
    कुछ ने लूट लिया है पर सब,
    लेकिन शक्ति हाथों में बाकी....

    वाह ... सार्थक सन्देश ... ईश्वर ने सब को बराबर दिया है पर सच ही की कुछ लोगों ने लूट लिया है ....

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  30. खूबसूरत कविता ,संवेदनायुक्त बधाई. कैलाश जी

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  31. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

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  32. धूल धूसरित चाहे तन हो,
    रोटी चाहे मिली हो आधी.
    मैंने हार अभी न मानी,
    जिजीविषा अब भी है बाकी....सामयिक रचना.

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  33. यह जिजीविषा बरकरार रहे, एक दिन अन्याय पर जीत अवश्य होगी!

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  34. बहुत ही प्रशंसनीय कविता। मेरे ब्लॉग " प्रेम सरोवर" के नवीनतम पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  35. दोष नहीं देती ईश्वर को,
    उसने सबको दिया बराबर.
    कुछ ने लूट लिया है पर सब,
    लेकिन शक्ति हाथों में बाकी.

    सही कहा है..एक दिन तो बदलाव आकर रहेगा..

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  36. शुक्रिया ज़नाब !मैंने हार अभी न मानी पर ही जा रहा हूँ .कृपया यहाँ भी पधारें -
    धूल धूसरित चाहे तन हो,
    रोटी चाहे मिली हो आधी.
    मैंने हार अभी न मानी,
    जिजीविषा अब भी है बाकी.यही वोटिस्तान का न्याय है भाई ,बदलूंगा इस दर्रे को कसम ये खाई ....

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  37. Aw, this was a very nice post. Taking the time and actual effort to create a
    great article… but what can I say… I procrastinate a whole lot and don't seem to get nearly anything done.
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