Friday, October 27, 2017

चलो पथिक आगे बढ़ जाओ

चलो पथिक आगे बढ़ जाओ,
यहाँ किसी का साथ न होगा।
नियति है तेरी चलना तनहा,
यहाँ कोइ हमराह न होगा।

कुछ पल की रौनक है जीवन,
फिर आगे का सफ़र अकेला।
इक दिन अंत इसे है होना,
हर दिन कहाँ चले है मेला।

कच्चे धागे से सब रिश्ते,
कब तक साथ निभा पायेंगे।
बोझ बढाओ मत कंधों पर,
कितनी दूर उठा पायेंगे।

छांव मिलेगी नहीं राह में,  
मरुथल से है तुम्हें गुज़रना|
अश्क़ रखो अपने संभाल के
अभी बहुत कुछ आगे सहना|      

सक्षम करलो तुम पग अपने,
अभी राह में शूल बहुत हैं।
भ्रमित न हो खुशियों के पल में
अभी तो मंजिल दूर बहुत है।

दुखित न हो पिछली भूलों से,
दे कर गयीं सबक जीवन का।
कौन सदा का साथ यहां है,
चलना यहां अकेला पड़ता।

...©कैलाश शर्मा

22 comments:

  1. आदरनीय कैलाश जी --- सुघड़ शैली में रची रचना मन को छू गयी | जीवन की अनंत यात्रा के अनेक सोपान और सबका अलग अनुभव | व्याकुल मन के भावों को उकेरती और खुद को ही समझती रचना बहुत ही बढ़िया बन पफी है | पढ़कर मन भावुक सा हो गया | आपको सादर शुभकामना आदरणीय |

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  2. Aisa laga ki mere bhav aapke lekhni se nikal padi...Antas ko chhooti huyi...

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  3. बहुत सुंदर प्रेरक रचना आपकी आदरणीय। विषम परिस्थितियों से जूझकर आगे बढ़ना ही जीवन है।

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  4. कर्तव्यों का बोध कराती हुई प्रेरणा दायक रचना।

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (29-10-2017) को
    "सुनामी मतलब सुंदर नाम वाली" (चर्चा अंक 2772)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. सुन्दर प्रस्तुति

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  7. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, आज के युवाओं से पर्यावरण हित में एक अनुरोध “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  8. पथ सबका अपना - साथ कैसे निभे !

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  9. इस जीवन में सब अकेले ही आते हैं और अकेले ही चलते हैं ...

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  10. चलते रहना ही कर्तव्य है ।
    सुंदर प्रेरणास्पद रचना ।

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  11. कौन सदा का साथ यहाँ है ..... बहुत ही सही
    अनुपम अभव्यक्ति

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  12. सक्षम कर लो, तुम पग अपने
    अभी राह में शूल बहुत हैंं ।
    भ्रमित न हो खुशियों के पल में
    अभी तो मंजिल बहुत दूर है ।.....
    लाजवाब प्रस्तुति, दार्शनिक भाव लिए.....
    वाह!!!!!

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  13. बहुत सुंदर रचना

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  14. सक्षम करलो तुम पग अपने,
    अभी राह में शूल बहुत हैं।
    भ्रमित न हो खुशियों के पल में,
    अभी तो मंजिल दूर बहुत है।
    बेहतरीन और प्रेरणादायक शब्द !!

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  15. सुन्दर एवं सटीक प्रसतुति

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  16. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति :)
    बहुत दिनों बाद आना हुआ ब्लॉग पर प्रणाम स्वीकार करें

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