गुनाह गर था जो चाहना उसको,
वही है मुंसिफ़ वही फैसला देगा।
वही है मुंसिफ़ वही फैसला देगा।
न राह हमने चुनी है, न मंजिल ही,
कहां है जाना वही फैसला लेगा।
कहां है जाना वही फैसला लेगा।
गुज़र गया है काफ़िला भी अब आगे,
राह सूनी में चलने का हौसला देगा।
राह सूनी में चलने का हौसला देगा।
निभाया साथ बहुत है ज़िंदगी तूने,
वक़्त-ए-रुख्सत पे हौसला देगा।
वक़्त-ए-रुख्सत पे हौसला देगा।
(अगज़ल/अभिव्यक्ति)
...कैलाश शर्मा
