Saturday, April 30, 2011

क्षणिकायें

     (१)
देख चुके जीवन में 
रंग सभी मौसम के,
इंतज़ार है
पतझड़ का,
जो उड़ा कर ले जाये
सूखे पीले पत्तों को
कहीं दूर
किसी अनज़ान सफ़र पर.

     (२)
कब तक लडेगा चाँद 
अंधियारे से,
आखिर धीरे धीरे
छुप जाता है
उसका अस्तित्व भी,
अमावस के आगोश में.

     (३)
क़ैद कर दो
ख़्वाबों को
किसी अँधेरे खँडहर में,
बहुत दुख देते हैं
टूट जाने पर.

     (४)
कुछ रिश्ते
बन जाते हैं बोझ इतना
कन्धों पर,
कि उनको ढ़ोते ढ़ोते
ज़िंदगी की आँखें भी
पथराने लगती हैं
मौत के इंतज़ार में.


48 comments:

  1. सुंदर और रुचिकर क्षणिकायें|

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  2. कब तक लडेगा चाँद
    अंधियारे से,
    आखिर धीरे धीरे
    छुप जाता है
    उसका अस्तित्व भी,
    अमावस के आगोश में...

    Amazing 'kshnikaayein' !

    Nothing is eternal in this universe.

    .

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  3. ख्वाबों को कैद कर लें, मुठ्ठी मजबूत करनी होगी।

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  4. सभी क्षणिकाएँ स्वयं को अभिव्यक्त करने में सक्षम ...

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  5. जीवन के सत्‍य को दर्शाती क्षणिकाएं।

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  6. इन बेजोड़ क्षणिकाओं के लिए बधाई स्वीकारें
    नीरज

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  7. बेहतरीन क्षणिकायें|

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  8. कुछ रिश्ते
    बन जाते हैं बोझ इतना
    कन्धों पर,
    कि उनको ढ़ोते ढ़ोते
    ज़िंदगी की आँखें भी
    पथराने लगती हैं
    मौत के इंतज़ार में.

    सभी क्षणिकाएँ एक से बढकर एक...

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  9. हम्म
    जीवन को सकारात्मक रूप में भी लिया जा सकता है...

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  10. सभी क्षणिकाएॅ बेहतरीन है। अन्तिम रचना दिल को छुती है।

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  11. ख्वाबों को कैद, यह क्या कह रहें है इन्हीके सहारे है
    बहुत सुन्दर बधाई.............

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  12. क़ैद कर दो
    ख़्वाबों को
    किसी अँधेरे खँडहर में,
    बहुत दुख देते हैं
    टूट जाने पर.
    बहुत सुंदर क्षणिकाएं।

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  13. कब तक लडेगा चाँद
    अंधियारे से,
    आखिर धीरे धीरे
    छुप जाता है
    उसका अस्तित्व भी,
    अमावस के आगोश में.


    गहन अभिव्यक्ति .... बहुत सुंदर क्षणिकाएं

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  14. सभी क्षणिकाए बहुत सुन्दर बधाई.

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  15. बहुत सुन्दर क्षणिकायें....

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  16. "कब तक लड़ेगा चाँद अंधियारे से "
    बहुत खूब सोच |बधाई
    आशा

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  17. बहुत ही सुंदर भावों के साथ आपकी अभिव्यक्ति उभर कर सामने आयी है।मन के किसी कोने में इन भावों का स्थिर होकर आपना अस्तित्व बनाए रखना एक बड़ी बात है । आपने मन तरंगों में उठते भावों को जीवन के सही संदर्भों में एक नया आयाम देने का अप्रतिम प्रयास किया है,जो काबिले तारीफ है।धन्यवाद।पुन:मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  18. सुँदर क्षणिकाये . ख्वाबों को स्वछन्द विचरण करने दे . ये ही तो जीवन के असली रंग है .

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  19. गहन जीवन दर्शन को व्याख्यायित करतीं बेहतरीन क्षणिकायें ! बधाई स्वीकार करें !

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  20. sabhee kshnikae jeevan darshan se judee yatharthbodh karatee......ek se bad kar ek hai.......ant to sabheeka ek hee hai aae hai to jana bhee hai par intzar ka mood dukhee kar gaya.......ise mood se ubarana jarooree hai.

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  21. बेहतरीन जीवन के सत्‍य को दर्शाती क्षणिकाएं जो काबिले तारीफ है।
    आपके जज्बे को सलाम !!

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  22. बहुत सुंदर क्षणिकाएं। धन्यवाद|

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  23. कुछ रिश्ते
    बन जाते हैं बोझ इतना
    कन्धों पर,
    कि उनको ढ़ोते ढ़ोते
    ज़िंदगी की आँखें भी
    पथराने लगती हैं
    मौत के इंतज़ार में.
    ... bahut khoob

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  24. हर क्षणिका ज़िंदगी से जुडी हुई ..बहुत अच्छी लगीं

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  25. ख़्वाबों को
    किसी अँधेरे खँडहर में,
    बहुत दुख देते हैं
    टूट जाने पर।

    गहन भावों को अभिव्यक्त करती सुंदर पंक्तियां।
    कविता के द्वारा कितनी सहजता से बहुत गहरी बातें कह देते हैं आप।

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  26. जीवन के सत्य को बेहद गरिमापूर्ण रूप दिया है आपने ...सादर !

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  27. avsaad se bhari hain aapki "BHAAVKANIKAAYEN"bhaai sahib .
    veerubhai

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  28. जिंदगी की हकीक़त है इन क्षणिकाओं में...

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  29. कब तक लड़ेगा चाँद अंधियारे से "

    बहुत ही अनुपम प्रस्‍तुति ।

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  30. कुछ रिश्ते
    बन जाते हैं बोझ इतना
    कन्धों पर,
    कि उनको ढ़ोते ढ़ोते
    ज़िंदगी की आँखें भी
    पथराने लगती हैं
    मौत के इंतज़ार में.
    सच जब रिश्तें निभाए नहीं जाते तब उनकों बोझ समझ ढोया ही जाता है...
    बहुत संवेदनशील प्रस्तुति

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  31. priy sharma sahab

    sunder abhivyakti sarabor karti huyi ......

    कुछ रिश्ते
    बन जाते हैं बोझ इतना
    कन्धों पर,
    कि उनको ढ़ोते ढ़ोते
    ज़िंदगी की आँखें भी
    पथराने लगती हैं
    मौत के इंतज़ार में.
    marmik swarup bhavnaon ka ji .shukriya .

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  32. क़ैद कर दो
    ख़्वाबों को
    किसी अँधेरे खँडहर में,
    बहुत दुख देते हैं
    टूट जाने पर.

    अच्छी लगीं क्षणिकायें ...

    कुछ दस, बारह बेहतरीन क्षणिकायें 'सरस्वती -सुमन' पत्रिका के लिए
    अपने संक्षिप्त परिचय और छाया चित्र के साथ यहाँ भेजें ....

    harkiratheer@yahoo.in

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  33. क़ैद कर दो
    ख़्वाबों को
    किसी अँधेरे खँडहर में,
    बहुत दुख देते हैं
    टूट जाने पर.
    बहुत ही सुंदर क्षणिकाएं |बहुत बहुत बधाई अग्रज शर्मा जी

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  34. आदरणीय श्रीकैलासजी,

    ज़िन्दगी क्या है ? मृत्यु का अहसान है.

    आप बड़े उम्दा शायर-कवि ही नहीं, पर उम्दा इन्सान भी है,तभी तो ज़िदगी के हर पहेलू, इतना सटीक बयान कर सकते हैं।

    आपको ढ़ेर सारी बधाईयाँ।

    मार्कण्ड दवे।
    http://mktvfilms.blogspot.com

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  35. कुछ रिश्ते
    बन जाते हैं बोझ इतना
    कन्धों पर,
    कि उनको ढ़ोते ढ़ोते
    ज़िंदगी की आँखें भी
    पथराने लगती हैं
    मौत के इंतज़ार में.

    सभी क्षणिकाएँ एक से बढकर एक...

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  36. कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका

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  37. क़ैद कर दो
    ख़्वाबों को
    किसी अँधेरे खँडहर में,
    बहुत दुख देते हैं
    टूट जाने पर...
    वाह ... यूँ तो चारों ही कमाल की हैं .. पर कुछ ख़ास है इस बात में ... कोई क़ैद खाना मिले तब ही ना ...

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  38. कब तक लडेगा चाँद
    अंधियारे से,
    आखिर धीरे धीरे
    छुप जाता है
    उसका अस्तित्व भी,
    अमावस के आगोश में.

    खुबसूरत

    निरामिष: अहिंसा का शुभारंभ आहार से, अहिंसक आहार शाकाहार से

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  39. क्षणिकाएं काबिले तारीफ है.

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  40. bahut accha sharma G hamre blog par roj aane ka
    ase hi aate rahiye ....apne pan ka ashsash hota hai hame bhi koi apne sa mil jata hai

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  41. bahut hi jabardast akeshnikaye aapke blog par aana bahut accha laga sir ji

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  42. aasha karta hoon aapse bahut kuch sikhne ko milega
    dhanywaad

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  43. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब क्षणिकाएं लिखा है जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  44. बेहद प्रभावशाली शब्दांकन, जीवन को करीब से देखने की प्रश्तुती बधाई

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  45. aadarniy sir
    vilamb se tippni dene ke liye main hriday se aapse xhama mangti hun.
    aksar hi aaj kal comments dene me mujhe deri ho jaati hai sawasthy ki gadbadi ke karan.

    sir aap waqai me bahut hi behtreen likhte hain .
    sari saari xhnikayen ek se badhkar ek hai .kiski
    tarrif karun

    (३)
    क़ैद कर दो
    ख़्वाबों को
    किसी अँधेरे खँडहर में,
    बहुत दुख देते हैं
    टूट जाने पर.
    behad hi achhi lagi
    hardik abhi nandan
    poonam

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  46. भावों की अभिव्यक्ति और शब्दों का चयन बहुत ख़ूब ..सुन्दर रचना....

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