Monday, February 27, 2012

वक़्त की लहरें

लिखा तो था हम दोनों ने
अपना नाम
साहिल की रेत पर,
बहा कर ले गयी
वक़्त की लहरें.


काश, 
लिखा होता पत्थर पर 
कर देता स्थापित
घर के एक कोने में
और होता नहीं अकेला
कम से कम मेरा नाम
तुम्हारे जाने पर.


कैलाश शर्मा 

51 comments:

  1. बहता नहीं नाम ... सागर की गहराई में साथ साथ होता है , यानि जीवन सार में वे विद्यमान होते हैं

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  2. बहुत सुन्दर...
    और होता नहीं अकेला
    कम से कम मेरा नाम
    तुम्हारे जाने पर.

    वाह!!!

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  3. प्रेम गति में तैर वही फिर
    शिखर तक ऊर्ध्व पहुँचता है.
    अखिल विश्व में इसी तरह
    आरोह-अवरोह क्रम चलता है.

    दिव्य तरंग के इस प्रवाह में
    मानव मन फिर डूबता है.
    जिसकी जितनी अपनी क्षमता
    उतनी गागर जल भरता है.

    स्व-संवेदना से माप उसी को
    सुख और दुःख वह कहता है.
    प्रेम तो है दोनों से अलिप्त
    ये दोनों मन में ही संलिप्त.

    अलिप्त - संलिप्त के द्वंद्व में
    घिसता-पिसता है मानव मन.
    करो अनुभूत इस प्रेम रूप को.
    करो बोध अपने स्वरुप को.

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  4. बहुत खूब ... उनके जाने के बाद नाम नहीं दिल भी तो सूना हो जाता है ... अच्छे भाव ...

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  5. bahut hi pyaari,dil ko chhu jane wali rachna

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  6. गहन भाव छिपे हैं इस रचना में |बहुत खूब |
    आशा

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  7. सुन्दर भावुक प्रस्तुति.
    पत्थर पर लिखा भी शायद वक्त की मार से विलुप्त हो जाए.
    लेख यदि हृदय पर लिखे हों तो अमर हो जाते हैं.

    प्रस्तुति के लिए आभार,कैलाश जी.

    मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

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  8. अंतरस्पर्शी रचना...
    सादर.

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  9. लहरें नाम मिटा देती हैं, अच्छा है पत्थर पर लिखता ।

    कोने में करता स्थापित, हर पल साथी सम्मुख दिखता ।।



    यादों को कितना खुबसूरत, कविवर आप बना देते हो ।

    पत्थर पर लिखकर क्या करना, दिल में सही सजा लेते हो ।।


    दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक
    http://dineshkidillagi.blogspot.in

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    1. लहरें नाम मिटा देती हैं, अच्छा है पत्थर पर लिखता...
      बहुत बढ़िया पंक्ति है..मुझे इस पर विष्णु सक्सेना याद आ गए, वो कहते हैं:
      तुमने पत्थर सा दिल हमको कह तो दिया
      पत्थरों पे लिखोगे मिटेगा नहीं...

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  10. लिखा तो था हम दोनों ने
    अपना नाम
    साहिल की रेत पर,
    बहा कर ले गयी
    वक़्त की लहरें.


    काश,
    लिखा होता पत्थर पर
    कर देता स्थापित
    घर के एक कोने में
    और होता नहीं अकेला
    कम से कम मेरा नाम
    तुम्हारे जाने पर
    जागी आँखों का खाब सा है पूरी रचना .

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  11. बहुत ही बढ़िया भावपूर्ण गहन अभिव्यक्ति ...

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  12. //होता नहीं अकेला
    कम से कम मेरा नाम
    तुम्हारे जाने पर.

    kaaashh aisa hota..
    bahut sundar shabd sirji :)

    palchhin-aditya.blogspot.in

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  13. पत्थर दिल पर अपना नाम कौन लिखना चाहता है..

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  14. बहुत खूबसूरत है

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  15. सर बहुत सुन्दर कविता

    लिखा तो था हम दोनों ने
    अपना नाम
    साहिल की रेत पर,
    बहा कर ले गयी
    वक़्त की लहरें.
    सर बहुत सुन्दर कविता बधाई

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  16. प्रश्न बनके कल तलक था सामने,आज वो उत्तर मुझे समझा रहा है
    अब अधेरी रात में भी दूर के,दीप का जलना ह्रदय को भा रहा है

    बहुत बढ़िया सराहनीय प्रस्तुति,सुंदर रचना के लिए बधाई .

    WEL COME TO MY NEW POST काव्यान्जलि ...: चिंगारी...

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  17. और होता नहीं अकेला
    कम से कम मेरा नाम
    तुम्हारे जाने पर.waah bahut badhiya.

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  18. वक़्त की लहरे.... बहुत कुछ कह गयी.....

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  19. बहुत सुंदर प्रेममयी भावाव्यक्ति ,बधाई

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  20. वक्त की लहरों ने नाम मिटा दिया...भावपूर्ण रचना|

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  21. भावमय करते शब्द , अंतर आवाज़ की तरह बधाई

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  22. वक़्त की लहरें भले ही मिटा दें उनके नाम को लेकिन वो हर सांस में जीते हैं, अमिट है उनकी छाप आत्मा पर... बहुत सुन्दर भाव...

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  23. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  24. रेत पर लिखा नाम भी तो अमिट ही होता है

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  25. सुन्दर भावाभिव्यक्ति,
    सादर

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  26. इस उम्दा रचना को पढ़वाने के लिए आभार!

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  27. क्या बात है.// वाह!

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  28. सुन्दर! पर पत्थर पे लिखा नाम दिल में लिखे नाम सा स्थाई कब हुआ है?

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  29. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  30. बहुत सुंदर ...मन कैसे तसल्ली ढूंढता है ...!!

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  31. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 01-03 -2012 को यहाँ भी है

    ..शहीद कब वतन से आदाब मांगता है .. नयी पुरानी हलचल में .

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  32. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 01-03 -2012 को यहाँ भी है

    ..शहीद कब वतन से आदाब मांगता है .. नयी पुरानी हलचल में .

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  33. man ke udgaron ka ka anokhe dhang se tasalli dhoondati hui anupam rachanaa .bahut badhaai aapko.
    आप का बहुत बहुत धन्यवाद की आप मेरे ब्लॉग पर पधारे और इतने अच्छे सन्देश दिए /आप का आशीर्वाद मेरी रचनाओं को हमेशा इसी तरह मिलता रहे यही कामना है /मेरी नई पोस्ट आप की टिप्पड़ी के इन्तजार में हैं/ जरुर पधारिये /लिंक है /
    http://prernaargal.blogspot.in/2012/02/happy-holi.html
    मैंने एक और कोशिश की है /अगर आप को पसंद आये तो उत्साह के लिए अपने सन्देश जरुर दीजिये /लिंक है
    http://www.prernaargal.blogspot.in/2012/02/aaj-jaane-ki-zid-na-karo-sung-by-prerna.html

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  34. मन की गहराइयों तक असर करने वाली कोमल कविता।

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  35. Time can prove to b a tough teacher :)
    lovely read !!

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  36. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय...... शुभकामनाएँ।

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  37. बहुत सार्थक भावुक प्रस्तुति, सुंदर रचना के लिए कैलाश जी बधाई,...

    NEW POST ...काव्यान्जलि ...होली में...

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  38. जब दिल की दीवार पर नाम लिख लिया जाता हैं तो ...वहाँ रेत और पत्थर पर लिखे नाम का वजूद भी फिका पड़ जाता हैं

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  39. और होता नहीं अकेला
    कम से कम मेरा नाम
    तुम्हारे जाने पर.....

    वाह!!!
    बहुत प्यारी रचना...

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  40. गहन प्रेम और टीस लिए बहुत ही सुंदर कविता!
    वाह !

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  41. chhoti si, par pyari si kavita

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  42. जहा प्रेम होता है वहा इतना दर्द क्यों होता है !!

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