Wednesday, September 05, 2012

हाइकु - जीवन

   (१)
रात का दर्द 
समझा है किसने
देखी है ओस?

   (२)
दिल का दर्द
दबाया था बहुत
छलकी आँखें.

   (३)
जीवन राह   
बहुत है कठिन 
जीना फिर भी.

   (४)
जाता है राही
वहीं रहती राह
सहती दर्द.

   (५)
न जाने कब
फिसली थी उंगली 
यादें ही बची.

   (६)
खून के रिश्ते
बन गये हैं पानी
बहे आँखों से.

   (७)
खोई ज़िंदगी
ढूँढता अँधेरे में
शायद मिले.

   (८)
थके कदम 
करते हैं तलाश
आख़िरी मोड़.

कैलाश शर्मा 

46 comments:

  1. ओस रात का दर्द है, आंसू दिल का दर्द |
    गर्द भरी यह राह है, बाकी यादें सर्द |
    बाकी यादें सर्द , मर्द औरत के रिश्ते |
    करूँ बयानी फर्द, रहे हैं रिसते -पिसते |
    गहरा घना अंधेर, देर मत करना ईश्वर |
    आना जाना फेर, मुक्त कर हारा रविकर ||


    उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  2. बहुत बढ़िया जिंदगी के दर्द को समेटे प्रभावशाली हाइकू ,,,,
    RECENT POST,तुम जो मुस्करा दो,

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  3. खून के रिश्ते बने पानी ..
    सभी हायकू यथार्थ में दर्द की अनुभूति दे रहे हैं १
    बेहतरीन!

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  4. रात का दर्द
    समझा है किसने
    देखी है ओस?
    sabhi sundar hai ....

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  5. सभी बहुत सुन्दर है..शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं

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  6. एक से बढ़ कर एक सुन्दर हाइकु - जीवन ...

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  7. रात का दर्द
    समझा है किसने
    देखी है ओस?......शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं

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  8. न जाने कब
    फिसली थी उंगली
    यादें ही बची.
    एहसासों की हाइकु भीड़ से यह मेरे हाथों में आ गया ....

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बृहस्पतिवार (06-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

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  10. ओस की तरह रात के एकान्त में पड़े रहना...गहरा..

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  11. दिल का दर्द
    दबाया था बहुत
    छलकी आँखें.
    सभी हाइकू अर्थ समेटे हुए अच्छे लगे बधाई

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  12. Haeku ka kya matlae he krupya kareke samjae dayevad

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    1. हाइकु जापानी साहित्य की एक विधा है. संक्षिप्त में कहा जाये तो हाइकु १७ अक्षर की एक छोटी कविता है जिसकी पहली और तीसरी पंक्ति में ५ और दूसरी पंक्ति में ७ अक्षर होते हैं. संयुक्त अक्षर को १ अक्षर माना जाता है.

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  13. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 06-09 -2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में ....इस मन का पागलपन देखूँ .

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  14. खून के रिश्ते
    बन गये हैं पानी
    बहे आँखों से.

    Bahut Sunder Haiku.....

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  15. बहुत अच्छे हाइकू |आभार

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  16. रात का दर्द
    समझा है किसने
    देखी है ओस?

    बहुत सुन्दर हाईकू ! सागर में गागर की तरह ! आभार !

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  17. खून के रिश्ते
    बन गये हैं पानी
    बहे आँखों से.........बहुत सुन्दर हाईकू !

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  18. सभी हाइकु लाजवाब .हैं पर पहला वाला सबसे ज्यादा पसंद आया
    रात का दर्द
    समझा है किसने
    देखी है ओस?
    ....इतनी बढ़िया रचनाओं के लिए ...साभार !!!!

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  19. सभी हाइकु बहुत प्रभावी है शर्मा जी !

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  20. बहुत बढ़िया...
    बेहतरीन हाइकु
    :-)

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  21. sabhi acche hain...
    ye sabse jyada pasand aaya
    खून के रिश्ते
    बन गये हैं पानी
    बहे आँखों से.

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  22. सभी एक से बढ़कर एक ...हाइकू ...आभार इस उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तु‍ति के लिए

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  23. न जाने कब
    फिसली थी उंगली
    यादें ही बची.

    BAHUT HI SUNDAR

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  24. बहुत सूंदर
    लिखे हैं
    तोड़ तोड़ !

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  25. जीवन दर्शन
    कराते है
    सुंदर हाइकू ।

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  26. kailash जी बहुत ही sundar rachnayein....

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  27. खून के रिश्ते
    बन गये हैं पानी
    बहे आँखों से.

    मार्मिक...सभी हाइकू बहुत अर्थवान हैं...

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  28. बहुत सुन्दर हैं सभी।

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  29. सभी हाइकू .. बहुत लाजवाब गहरा अर्थ समेटे ...

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  30. जीवन राह
    बहुत है कठिन
    जीना फिर भी.

    यथार्थ को शब्दों में सुंदरता के साथ पिरोया है आपने।

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  31. अति उत्तम हाइकु..

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  32. अपने आप में अर्थपूर्ण हाइकू

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  33. सुन्दर हाइकु लेखन शर्मा जी न जाने कब
    फिसली थी उंगली
    यादें ही बची.

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