Sunday, January 13, 2013

हाइकु

१)
न होता दुःख 
गर समझ पाता,
स्वार्थी रिश्तों को.

२)
रिश्तों की नाव
डगमगाने लगी,
मंजिल दूर.

३)
नयन उठे,
बेरुखी थी आँखों में,
बरस गये.

४)
रात्रि या दिन
क्या फ़र्क पड़ता है,
सूना जीवन.


५)
घना अँधेरा                         
हर कोना है सूना,
ज़िंदगी मौन.

६)
ज़िंदगी बता              
क्या खता रही मेरी,
तू रूठ गयी.

७)
कदम उठे                      
रोका था देहरी ने, 
ठहर गये.

८)
सांस घुटती                                  
रिश्तों की दीवारों में,
बाहर चलें.

कैलाश शर्मा 

36 comments:

  1. kya bat hai...har haykoo bahut kuchh kah gaya..

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  2. so much said in such a few words !!

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  3. जिन्दगी का फ़लसफ़ा बयाँ कर दिया है कैलाश शर्मा जी आपने .......ये हाइकु-हाइकु क्या है ...हम न जाने बस परेशान हैं :-))
    शुभकामनायें!

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  4. अद्धभुत अभिव्यक्ति है !!

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  5. चुने हैं लम्हे
    भाव भरे शब्द
    और क्या कहूँ

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  6. बहुत ही सुन्दर , सजीव हाइकू .....गहन अभिव्यक्ति !

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  7. बाऊ जी नमस्ते!
    सार्थक चिंतन!

    --
    थर्टीन रेज़ोल्युशंस

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  8. भाव भरे शब्दों में सुन्दर हाइकू,आभार।

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  9. क्या बात है कैलाश सर। आप भी बड़े सुन्दर हाइकु लिखते हैं।

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  10. रिश्तों की अनोखी धूप छाँव झलकाते... खूबसूरत हाईकु!
    ~सादर !!!

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  11. बहुत सुन्दर

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  12. न होता दुःख
    गर समझ पाता,
    स्वार्थी रिश्तों को.

    उम्दा हाइकू

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  13. मुक्तिपथ,
    भ्रमित रथ।

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  14. नयन उठे,
    बेरुखी थी आँखों में,
    बरस गयीं.

    ये तो होना ही था

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  15. बहुत ही बढ़ियाँ हाइकु
    सभी बहुत ही बेहतरीन....
    :-)

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  16. बहुत सुंदर ...जीवन से जुड़े से हाइकू

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  17. बहुत सुन्दर हाइकू

    रिश्तों की दीवारों में बस घुटती साँसें,
    चुभी ह्रदय में कैसी कैसी तीखी फान्सें

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  18. बहुत सुन्दर...लाज़वाब हाइकू .....गहन अभिव्यक्ति के लिए आपका आभार

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  19. नयन उठे,
    बेरुखी थी आँखों में,
    बरस गये...
    बहुत शानदार ।
    मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें

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  20. कदम उठे
    रोका था देहरी ने,
    ठहर गये.
    बहुत सुन्दर हाइकू. मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें !

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  21. सांस घुटती
    रिश्तों की दीवारों में,
    बाहर चलें.
    सभी हाइकू एक से बढ़कर एक ...

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  22. हर्फ़-दर-हर्फ़ बेहतरीन..

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  23. वाह !सुंदर पंक्तियाँ .बहुत सुन्दर हाइकू.

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  24. जिंदगी के संग और रंग के सार्थक हाइकु

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  25. जीवन की उच्छ्वास सुवास हताशा और आस लिए हैं सारे हाइकु .

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  26. जीवन की उच्छ्वास सुवास हताशा और आस लिए हैं सारे हाइकु .

    ram ram bhai
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    मंगलवार, 15 जनवरी 2013
    नौनिहालों में दमे के खतरे के वजन को बढ़ाता है कबाड़िया भोजन

    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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  27. सब के सब सुन्दर और लाजवाब हाईकू..आभार

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  28. हर एक हाईकू काफी सुन्दर .....
    सादर !

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  29. ८)
    सांस घुटती
    रिश्तों की दीवारों में,
    बाहर चलें.

    बहुत सशक्त अभिव्यक्ति यथार्थ की झरबेरियों के साथ .

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  30. गहरे भाव छिपे हैं इन हाइकू में |
    आशा

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  31. आभार ज़नाब की सद्य टिपण्णी का जीवन के प्रतिबिम्बन लेकर आये हाइकु का .

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  32. उदासी से भरे हाइकू !

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