Friday, March 15, 2013

शब्दों की पोटली


                                                         (चित्र गूगल से साभार) 
शब्द थे खो जाते
भाव के बवंडर में
और रह जाता खड़ा
बन के मौन पुतला
तुम्हारे सामने.

सोचा बाँध कर रख दूं
एक पोटली में
उन शब्दों को
जो कह न पाया,
और सौंप दूँ तुम्हें
तुम्हारे आने पर.

तुम्हारी मंज़िल की राह 
नहीं जाती अब इस गली से,
आज भी खड़ा हूँ
प्रतीक्षा में दरवाज़े पर
लेकर शब्दों की पोटली
जो कुलबुला रहे हैं
बाहर आने को.

कैलाश शर्मा 

41 comments:

  1. शब्द पोटली में आखिर कब तक रहेंगे ........ विषैले न हो जाएँ घुटकर

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  2. बहुत बढ़िया ...शब्दों को कितना भी पोटली में बांधिए , हवामें खुशबु की तरह बिखर ही जायेंगे

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  3. अनुपम भाव ... लिये बेहतरीन प्रस्‍तुति

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  4. वाह्ह ....मनोभावों की सुंदर तस्वीर ......उम्दा
    सादर नमस्कार भाईसाहब !

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  5. उन शब्दों को राह मिले।

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  6. शब्‍दों का प्रेमिल लक्ष्‍य पूर्ण हो, यही कामना है।

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  7. पोटली खुले, शब्द शब्द छलके, और वो इनके रंग में हों सराबोर

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  8. मनहर प्रस्तुति |
    आभार आदरणीय-

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  9. शब्द निकल तो रहे हैं पोटली से इस कविता के माध्यम से !
    सुन्दर !

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  10. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (16-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  11. बंद पोटली के भी कुछ न कुछ भाव नज़र आ ही जाते हैं सामने ....बहुत बढ़िया ...

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  12. पोटली से निकल अभिव्यक्ति पायें ये शब्द...... सुंदर कविता

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  13. shabdo ki potli say kuch shabdo ki khusboo yahan bhi pahunch gayi hai.....sundar prastuti

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  14. सोचा बाँध कर रख दूं
    एक पोटली में
    उन शब्दों को
    जो कह न पाया,
    और सौंप दूँ तुम्हें
    तुम्हारे आने पर.
    kya ye sambhav hai agar hai to avashy kijiye .sundar bhavabhivyakti badhai .

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  15. शब्द की कैसी विडम्बना है ये जिन्हें मुखर होना चाहिए वे पोटली में बंधे हैं ! मंजिल की राह भी बदल गयी है ! उन्हें उन्मुक्त कर दें वे खुद ब खुद मंजिल तलाश लेंगे ! बहुत सुंदर रचना !

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  16. पोटली में बंधे शब्द, बहुत सुंदर

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  17. शब्दों को पोटली में.अब पोटली से निकल कागज़ पर
    सोचा बाँध कर रख दूं
    एक पोटली में
    उन शब्दों को
    जो कह न पाया,
    और सौंप दूँ तुम्हें
    तुम्हारे आने पर.

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  18. सुन्दर भाव लिए बेहतरीन प्रसतुति,आभार.

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  19. शब्‍दों और व्‍यक्तित्‍व की व्‍यथा बढिया है।

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  20. स्वागत है शब्दों का भाई जी !

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  21. सुन्दर शब्दों के साथ सुन्दर प्रस्तुति

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  22. सुन्दर रचना

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  23. आज भी खड़ा हूँ
    प्रतीक्षा में दरवाज़े पर
    लेकर शब्दों की पोटली
    जो कुलबुला रहे हैं
    बाहर आने को------
    वाह जीवन की सच्चाई,भावपूर्ण रचना
    बधाई

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  24. शब्द थे खो जाते
    भाव के बवंडर में
    और रह जाता खड़ा
    बन के मौन पुतला
    तुम्हारे सामने.

    भावप्रवण प्रस्तुति.

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  25. शब्द थे खो जाते
    भाव के बवंडर में
    और रह जाता खड़ा
    बन के मौन पुतला
    तुम्हारे सामने.
    ....शब्दों कि पोटली आखिर खुल ही गयी ....पर विस्तार रफ्ता रफ्ता ...भावमयी रचना

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  26. शब्द इस शब्दों की पोटली से बह न जाए ...
    काश वो जल्दी आ जाएं ...
    मधुर भाव लिए ...

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  27. बहुत सुन्दर ख्यालात ......

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  28. जो शब्दों से कहा जाता है वह सीमित है..निशब्द में तो वह सब भी पहले ही कह दिया गया है..आभार!

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  29. पोटली बाँध ली तो क्या -अर्थ फिर भी छलक रहे हैं !

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  30. बहुत अच्छे भाव....
    शब्दों की पोटली....खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह गयी......
    ~सादर!!!

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  31. आपकी यह रचना दिनांक 07.06.2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

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  32. आपकी यह सुन्दर रचना शनिवार 08.06.2013 को निर्झर टाइम्स (http://nirjhar-times.blogspot.in) पर लिंक की गयी है! कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

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