Wednesday, June 06, 2012

राह मिल जायेगी

ढल जायेगी रात, 
सहर फ़िर आयेगी,
मन में हो विश्वास, 
राह मिल जायेगी.

             
क्यों तलाशते राह 
मिलें न कांटे जिसमें.
कहाँ मिलेंगे नयन
न आये आंसू जिसमें.

सुख दुःख ले लो साथ, 
वक़्त की देन समझ कर,
गम के बादल आज, 
खुशी कल आयेगी.

सूरज जब उगता है,
डरता कब ढलने से.
काँटों से घिर गुलाब,
न डरता है खिलने से.

अगर न हो संघर्ष, 
तो जीवन सूना सूना,
खोओगे एक राह, 
नयी मिल जायेगी.

कितना भी ऊँचा हो पर्वत,
हिम्मत से ऊँचा कब होता?
कितना लंबा सफ़र चाँद का,
मगर राह में कहीं न सोता.

राहें हों सुनसान, 
पथिक कब रुकता है,
थकने दो न पांव,
तो मंज़िल आयेगी.


कैलाश शर्मा 

32 comments:

  1. कितना भी ऊँचा हो पर्वत,
    हिम्मत से ऊँचा कब होता?
    सशक्‍त भाव ... उत्‍कृष्‍ट लेखन .. आभार आपका

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  2. राहें हों सुनसान,
    पथिक कब रुकता है,
    थकने दो न पांव,
    तो मंज़िल आयेगी,,,,,

    मन मोहक सुंदर उत्‍कृष्‍ट प्रस्तुति ,,,,,

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,
    .

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  3. क्यों तलाशते राह
    मिलें न कांटे जिसमें.
    कहाँ मिलेंगे नयन
    न आये आंसू जिसमें...

    सच है ये तो जीवन की रीत है ... फूलों के साथ कांटे होते हैं तभी फूलों का मज़ा रहता ही .. सुख दुःख के बाद अधिक बढ़ जाता है ...

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  4. अगर न हो संघर्ष,
    तो जीवन सूना सूना,
    खोओगे एक राह,
    नयी मिल जायेगी.
    प्रेरणा जगातीं भावपूर्ण पंक्तियाँ...सुंदर कविता !

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  5. सूरज जब उगता है,
    डरता कब ढलने से.
    काँटों से घिर गुलाब,
    न डरता है खिलने से... तो हिम्मत क्यूँ हारना , अँधेरे के बाद सवेरा है न

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  6. थकने दो न पांव,
    तो मंज़िल आयेगी.

    sargarbhit ...bahut sundar rachna ...
    shubhkamnayen .

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  7. सकरात्मक भाव लिए निराशा मेन भी आशा के दीप जालती सुंदर सार्थक रचना...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका सवागत है http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/

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  8. क्यों तलाशते राह
    मिलें न कांटे जिसमें.
    कहाँ मिलेंगे नयन
    न आये आंसू जिसमें.

    आशा के समझौता वादी स्वर .कितनी दूरी मंजिल की हो चलते चलते कट जाती है .

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  9. प्रेरणा जगातीं भावपूर्ण पंक्तियाँ..सुंदर सार्थक रचना.

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  10. कितना भी ऊँचा हो पर्वत,
    हिम्मत से ऊँचा कब होता?
    वाह! बहुत ही प्रेरक गीत....
    सादर।

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  11. ढल जायेगी रात,
    सहर फ़िर आयेगी,
    मन में हो विश्वास,
    राह मिल जायेगी....बस इसी हौसले की जरुरत है..... हम सभी को.....

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  12. जब तक बाधाएं न होंगी पथ में.
    हम सबसे अलग दिखेंगे कैसे...?

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    1. बहुत सच कहा है....

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  13. बिना पाँव थके और आँखे पथराये मंजिल कहाँ मिलती है।

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  14. राही चल चला चल....
    बहुत सुंदर गीत...
    सादर.

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  15. प्रेरणा जगातीं भावपूर्ण सुन्दर गीत....मन में हो विश्वास,
    राह मिल जायेगी.

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  16. बहुत सुन्दर होंसले जगाती हुई अप्रतिम रचना ....बधाई आपको

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  17. क्यों तलाशते राह
    मिलें न कांटे जिसमें.
    कहाँ मिलेंगे नयन
    न आये आंसू जिसमें.

    सकारात्मक सोच लिए हुए सुन्दर रचना

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  18. ढल जायेगी रात,
    सहर फ़िर आयेगी,
    मन में हो विश्वास,
    राह मिल जायेगी.

    विश्वास की शक्ति बनाए रखना जरूरी है...
    उत्कृष्ट रचना !!!

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  19. क्यों तलाशते राह
    मिलें न कांटे जिसमें.
    कहाँ मिलेंगे नयन
    न आये आंसू जिसमें.......khoobsurat bhaw......

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  20. थकने दो न पांव,
    तो मंज़िल आयेगी
    आगे बदने को प्रेरित करती रचना

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  21. आत्मविश्वास जगाती प्रेरक रचना, शुभकामनाएँ.

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  22. अगर न हो संघर्ष,
    तो जीवन सूना सूना,
    खोओगे एक राह,
    नयी मिल जायेगी.

    बेहतरीन...आशा जगाती ये पोस्ट।

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  23. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

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  24. आशा और विश्वास जगाती बेहतरीन रचना...
    ऐसे ही आत्मविश्वास के साथ चले तो मंजिल दूर नहीं...
    :-)

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  25. मन में हैं विश्वास ...पूरा हैं विश्वास कि हर राह खुद चल कर अपने करीब आएगी

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  26. क्यों तलाशते राह
    मिलें न कांटे जिसमें.
    यह बहोत अच्छा लगा

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  27. खग उड़ते रहना जीवन भर ....
    सुन्दर आशावादी कविता
    आभार

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