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Wednesday, March 27, 2019

शब्दों की चोट


बहुत आसान है फेंकना 
एक कंकड़ शब्द का 
और कर देना पैदा
लहरें अशांति की
अंतस के शांत जल में।

बिखरी हुई अशांत लहरें
यद्यपि हो जातीं शांत 
समय के साथ,
लेकिन कितना कठिन है
लगाना अनुमान गहराई का
जहाँ देकर गया चोट
वह फेंका हुआ कंकड़ झील में।

...©कैलाश शर्मा

Friday, January 04, 2019

पली गैर हाथों यह ज़िंदगी है


करीने से सज़ी कब ज़िंदगी है,
यहां जो भी मिले वह ज़िंदगी है।

सदा साथ रहती कब चांदनी है,
अँधेरे से सदा अब बंदगी है।

हमारी ज़िंदगी कब थी हमारी,
पली गैर हाथों यह ज़िंदगी है।

नहीं है नज़र आती साफ़ नीयत,
जहां देखता हूँ बस गंदगी है।

दिखाओगे झूठे सपने कब तक,
सजे फिर कब है बिखर ज़िंदगी है।

...©कैलाश शर्मा

Wednesday, May 02, 2018

अनकहे शब्द


फंस जाते जब शब्द 
भावनाओं के अंधड़ में
और रुक जाते कहीं 
जुबां पर आ कर,
ज़िंदगी ले लेती 
एक नया मोड़।

सुनसान पलों में
जब भी झांकता पीछे,
पाता हूँ खड़े 
वे रुके हुए शब्द 
जो भटक रहे हैं
आज़ भी आँधी में,
तलाशते वह मंज़िल
जो खो गयी कहीं पीछे।

...©कैलाश शर्मा

Thursday, March 22, 2018

ज़िंदगी


जग में जब सुनिश्चित
केवल जन्म और मृत्यु
क्यों कर देते विस्मृत
आदि और अंत को,
हो जाते लिप्त
अंतराल में 
केवल उन कृत्यों में 
जो देते क्षणिक सुख
और भूल जाते उद्देश्य 
इस जग में आने का।


बहुत है अंतर ज़िंदगी गुज़ारने
और ज़िंदगी जीने में,
रह जाती अनज़ान ज़िंदगी 
कभी जी कर भी वर्षों तक,
कभी जी लेते भरपूर ज़िंदगी 
केवल एक पल में।


...©कैलाश शर्मा

Thursday, September 14, 2017

दर्द को आशियां मिला

दर्द को आशियां मिला,
मिरे घर का निशां मिला.

तू न मेरा नसीब था,
दर्द का साथ तो मिला.

रात भर जागते रहे,
सुबह खाली मकां मिला.

ज़िंदगी इस तरह रही,
हर किसी को रहा गिला.

चंद लम्हे खुशी मिली,
फिर अँधेरा घना मिला।

...©कैलाश शर्मा

Wednesday, August 23, 2017

क्षणिकाएं

व्याकुल हैं भाव
उतरने को पन्नों पर,

लेकिन सील गये पन्ने
रात भर अश्कों से,
सियाही लिखे शब्दों की
बिखर जाती पन्नों पर
और बदरंग हो जाते पन्ने
गुज़री ज़िंदगी की तरह।।
      *****

क्यों उलझ जाती ज़िंदगी 
रिश्तों के जाल में,
होता कठिन सुलझाना
इस मकड़जाल को,
न ही तोड़ पाते 
न ही सुलझा पाते 
उलझे धागे,
कितना कठिन निकलना बाहर 
और जी पाना मुक्त बंधनों से।
     *****

काश पढ़ ही लेते
अपने दिल की क़िताब,
मिल जाते उत्तर
मुझसे पूछे
अनुत्तरित प्रश्नों के।


...©कैलाश शर्मा