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Wednesday, March 27, 2019
शब्दों की चोट
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Friday, January 04, 2019
पली गैर हाथों यह ज़िंदगी है
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Wednesday, May 02, 2018
अनकहे शब्द
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शब्द
Thursday, March 22, 2018
ज़िंदगी
जग में जब सुनिश्चित
केवल जन्म और मृत्यु
क्यों कर देते विस्मृत
आदि और अंत को,
हो जाते लिप्त
केवल जन्म और मृत्यु
क्यों कर देते विस्मृत
आदि और अंत को,
हो जाते लिप्त
अंतराल में
केवल उन कृत्यों में
जो देते क्षणिक सुख
और भूल जाते उद्देश्य
इस जग में आने का।
केवल उन कृत्यों में
जो देते क्षणिक सुख
और भूल जाते उद्देश्य
इस जग में आने का।
बहुत है अंतर ज़िंदगी गुज़ारने
और ज़िंदगी जीने में,
और ज़िंदगी जीने में,
कभी जी कर भी वर्षों तक,
कभी जी लेते भरपूर ज़िंदगी
केवल एक पल में।
...©कैलाश शर्मा
Thursday, September 14, 2017
दर्द को आशियां मिला
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Wednesday, August 23, 2017
क्षणिकाएं
व्याकुल
हैं भाव
उतरने को पन्नों पर,
लेकिन सील गये पन्ने
रात भर अश्कों से,
सियाही लिखे शब्दों की
बिखर जाती पन्नों पर
और बदरंग हो जाते पन्ने
गुज़री ज़िंदगी की तरह।।
उतरने को पन्नों पर,
लेकिन सील गये पन्ने
रात भर अश्कों से,
सियाही लिखे शब्दों की
बिखर जाती पन्नों पर
और बदरंग हो जाते पन्ने
गुज़री ज़िंदगी की तरह।।
*****
क्यों उलझ जाती ज़िंदगी
रिश्तों के जाल में,
होता कठिन सुलझाना
इस मकड़जाल को,
न ही तोड़ पाते
न ही सुलझा पाते
उलझे धागे,
कितना कठिन निकलना बाहर
और जी पाना मुक्त बंधनों से।
रिश्तों के जाल में,
होता कठिन सुलझाना
इस मकड़जाल को,
न ही तोड़ पाते
न ही सुलझा पाते
उलझे धागे,
कितना कठिन निकलना बाहर
और जी पाना मुक्त बंधनों से।
*****
काश पढ़ ही लेते
अपने दिल की क़िताब,
मिल जाते उत्तर
मुझसे पूछे
अनुत्तरित प्रश्नों के।
अपने दिल की क़िताब,
मिल जाते उत्तर
मुझसे पूछे
अनुत्तरित प्रश्नों के।
...©कैलाश शर्मा
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