Sunday, June 17, 2012

पितृ प्रेम को शब्द नहीं है


(पितृ दिवस पर अपनी एक पुरानी रचना दुबारा पोस्ट कर रहा हूँ)


गीत लिखे माँ की ममता पर, 
प्यार पिता का किसने देखा,
माँ  के  आंसू  सबने  देखे,  
दर्द पिता का किसने देखा.

माँ की ममता परिभाषित है, 
पितृ प्रेम  को  शब्द  नहीं है,
कितने अश्क छुपे पलकों में, 
वहां झाँक कर किसने देखा.

उंगली पकड़ सिखाया चलना, 
छिटक दिया है उन हाथों को,
तन की चोट सहन हो जाती, 
मन  का घाव न  भरते देखा.

दर्द  छुपा कर  बोझ  उठाया, 
झुकने दिया नहीं कन्धों को,
कोई  रख दे  हाथ  प्यार  से, 
इन्हें  तरसते  किसने  देखा.

विस्मृत हो जायें कटु यादें, 
मंजिल पर जाने  से पहले,
हो जायें  ये  साफ़  हथेली, 
मिट जायें रिश्तों की रेखा.

कैलाश शर्मा 

36 comments:

  1. मेरे मन के भावो को शब्दो मे पिरो दिया आपने आभार

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  2. बहुत सुन्दर रचना है...
    बहुत सुन्दर...
    :-)

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  3. सामयिक, सार्थक और अच्छी रचना है .

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  4. bahut sundar bhaav ...
    shubhkamnayen.

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  5. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 18-06-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-914 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  6. पिता की सोच , पिता का ख्याल , पिता का प्यार अनुभव से ही समझा जा सकता है

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  7. उंगली पकड़ सिखाया चलना,
    छिटक दिया है उन हाथों को,
    तन की चोट सहन हो जाती,
    मन का घाव न भरते देखा.

    मन के घाव कब भरते हैं भला ...
    बहुत सुन्दर रचना

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  8. यह स्नेहिल भाव सदा ही छिपा छिपा सा रहता है..

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  9. दर्द छुपा कर बोझ उठाया,
    झुकने दिया नहीं कन्धों को,
    कोई रख दे हाथ प्यार से,
    इन्हें तरसते किसने देखा.

    दर्द सहकर भी पिता खुशी पाते है.

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  10. पिता सदा पृष्ठभूमि ही बने रहते हैं ....हृदयस्पर्शी

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  11. दर्द छुपा कर बोझ उठाया,
    झुकने दिया नहीं कन्धों को,
    कोई रख दे हाथ प्यार से,
    इन्हें तरसते किसने देखा. मन को छू लिया

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  12. माँ की ममता परिभाषित है,
    पितृ प्रेम को शब्द नहीं है,
    कितने अश्क छुपे पलकों में,
    वहां झाँक कर किसने देखा.

    मन छूती सुंदर रचना,,,,बेहतरीन भावअभिव्यक्ति,,,,

    RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

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  13. पिता आकाश है,उसके बिना कैसे अंकुरित होगी ,हवा-धूप को तरस मुरझ जायेगी नन्हीं कोंपल !

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  14. पिता पर आपकी यह रचना भाव विह्वल कर गयी

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  15. पिता को समर्पित बेहतरीन रचना !

    ...अक्सर पिता का प्यार अनदेखा होता.है.

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  16. विस्मृत हो जायें कटु यादें,
    मंजिल पर जाने से पहले,
    हो जायें ये साफ़ हथेली,
    मिट जायें रिश्तों की रेखा.
    दिल को छू गई .... एक
    पिता की पिता पर रचना ....

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  17. माँ के आंसू सबने देखे , दर्द पिता का किसने देखा ...
    सच ही , पिता का प्रेम और दर्द अनदेखा ही रह जाता है !
    अच्छी कविता !

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  18. **♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**
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    बेहतरीन रचना

    केरा तबहिं न चेतिआ,
    जब ढिंग लागी बेर



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥

    ♥ संडे सन्नाट, खबरें झन्नाट♥


    ♥ शुभकामनाएं ♥
    ब्लॉ.ललित शर्मा
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  19. इस अंतरस्पर्शी रचना के लिए सादर नमन स्वीकारे....

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  20. कालजयी रचना सदैव नवीनता से भर देती है.. हृदयस्पर्शी रचना..

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  21. सच कहा आपने. पिता के प्यार को अक्सर अनदेखा किया जाता है

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  22. दर्द छुपा कर बोझ उठाया,
    झुकने दिया नहीं कन्धों को,
    कोई रख दे हाथ प्यार से,
    इन्हें तरसते किसने देखा.
    भावमय करते शब्‍द ... आभार

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  23. बहुत सुन्दर.............
    जी भर आया.
    पिता के प्यार को अक्सर बेटे समझते नहीं और अनदेखा करते हैं....
    मगर हम बेटियाँ नहीं...

    सादर

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  24. बड़ी ईमानदारी से पिता के दर्द को अभिव्यक्ति दी है आपने ! पिता चूँकि अपने दर्द को दिखाते नहीं हैं उनकी पीड़ा अनदेखी अनसुनी ही रह जाती है ! आपने बड़ी संवेदनशीलता के साथ उसे उकेरा है ! बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति !

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  25. दर्द छुपा कर बोझ उठाया,
    झुकने दिया नहीं कन्धों को,
    कोई रख दे हाथ प्यार से,
    इन्हें तरसते किसने देखा....

    वाह .. पिता के दिल कों खोल के रख दिया आपने ... सच में पिता के त्याग कों कोई देखता नहीं पर वो किसी से कम नहीं है ...

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  26. एक लड़की के लिए ...उसके पिता का महत्व कोई हम से पूछे ...

    इस रचना ने दिल को छू लिया

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  27. बहुत सुन्दर रचना ,मन भर आया कैलाशजी...सच है..माँ के आंसू सबने देखे,
    दर्द पिता का किसने देखा.....बहुत सुन्दर..

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  28. मन छू लेने वाली कविता .

    सादर .

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  29. मन छूती सुंदर रचना ,बेहतरीन भावभिव्यक्ति.....

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  30. माँ की ममता परिभाषित है,
    पितृ प्रेम को शब्द नहीं है,
    कितने अश्क छुपे पलकों में,
    वहां झाँक कर किसने देखा.

    मन को छूती रचना !!

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  31. बहुत सुन्दर और सटीक पोस्ट।

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  32. बहुत अच्छी और प्रभावशाली प्रस्तुति...

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  33. मन को छूनेवाली रचना।

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