Kashish - My Poetry
Showing posts with label
अशांत लहरें
.
Show all posts
Showing posts with label
अशांत लहरें
.
Show all posts
Wednesday, March 27, 2019
शब्दों की चोट
बहुत आसान है फेंकना
एक कंकड़ शब्द का
और कर देना पैदा
लहरें अशांति की
अंतस के शांत जल में।
बिखरी हुई अशांत लहरें
यद्यपि हो जातीं शांत
समय के साथ
,
लेकिन कितना कठिन है
लगाना अनुमान गहराई का
जहाँ देकर गया चोट
वह फेंका हुआ कंकड़ झील में।
...
©कैलाश शर्मा
Older Posts
Home
View mobile version
Subscribe to:
Posts (Atom)